कराची के ल्यारी में ताबड़तोड़ गोलीबारी और फिल्म धुरंधर से जुड़ा इसका असली सच

कराची के ल्यारी में ताबड़तोड़ गोलीबारी और फिल्म धुरंधर से जुड़ा इसका असली सच

कराची का ल्यारी इलाका एक बार फिर गोलियों की तड़तड़ाहट से दहल उठा है। जेल में बंद कुख्यात गैंगस्टर उजैर बलोच का भाई जुबैर बलोच चाकीवारा रोड पर गोलियों का शिकार हो गया। फिलहाल वो अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहा है। इस वारदात के बाद इंटरनेट पर फिर से उजैर बलोच और ल्यारी गैंगवार ट्रेंड करने लगा है। इसकी सबसे बड़ी वजह बॉलीवुड फिल्म 'धुरंधर' है।

अगर आपने हालिया ब्लॉकबस्टर फिल्म 'धुरंधर' देखी है, तो आपको ल्यारी का नाम जरूर याद होगा। वही ल्यारी जहां गैंगस्टरों का राज चलता था और गलियों में सरेआम गोलियां बरसती थीं। पर्दे पर जो क्राइम और ड्रामा दिखाया गया था, उसकी कड़वी हकीकत गुरुवार शाम कराची की सड़कों पर एक बार फिर जिंदा हो गई।

ल्यारी के सिंगू लेन में क्या हुआ

गुरुवार की शाम करीब 40 साल का जुबैर बलोच अपने घर के बाहर सिंगू लेन में बैठा हुआ था। चाकीवारा पुलिस स्टेशन के पास का यह इलाका हमेशा चहल-पहल वाला रहता है। तभी मोटरसाइकिल पर सवार नकाबपोश हमलावर वहां पहुंचे।

बिना किसी चेतावनी के हमलावरों ने पिस्तौल निकाली और जुबैर पर गोलियों की बौछार कर दी। हमला इतनी तेजी से हुआ कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। पास ही मौजूद एक दुकानदार ने जब जवाब में फायरिंग की, तब हमलावर मौके से फरार हो गए।

गोलीबारी की इस घटना में जुबैर बलोच को सीने और पेट में कई गोलियां लगी हैं। उसे तुरंत कराची के सिविल अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों को उसकी जान बचाने के लिए इमरजेंसी सर्जरी करनी पड़ी। इस वारदात में वहां से गुजर रहे दो बेकसूर राहगीर भी गंभीर रूप से घायल हो गए।

कौन है जुबैर बलोच और क्या है इसका आपराधिक रिकॉर्ड

जुबैर बलोच कोई आम नागरिक नहीं है। वो पीपुल्स अमन कमेटी (PAC) के पूर्व प्रमुख और कुख्यात डॉन उजैर बलोच का सगा भाई है।

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साउथ डीआईजी सैयद असद रजा के मुताबिक, जुबैर बलोच पर 2012 में हत्या, पुलिस एनकाउंटर और अवैध हथियार रखने समेत सात अलग-अलग आपराधिक मामले दर्ज हुए थे। उसे साल 2012 में गिरफ्तार किया गया था और जनवरी 2025 में ही वो जेल से बाहर आया था।

जेल से छूटने के कुछ महीने बाद जुबैर ने एक स्थानीय राजनीतिक पार्टी ज्वाइन कर ली थी और अपने मोहल्ले में पार्टी के झंडे भी लगाए थे।

फिल्म धुरंधर और ल्यारी का असली कनेक्शन

आदित्य धर के निर्देशन में बनी फिल्म 'धुरंधर' और इसके दूसरे भाग 'धुरंधर: द रिवेंज' में कराची के इसी ल्यारी गैंगवार को दिखाया गया है। फिल्म में अभिनेता दानिश पांडोर ने उजैर बलोच का किरदार निभाया है। वहीं अक्षय खन्ना ने रहमान डकैत और रणवीर सिंह ने भारत के अंडरकवर एजेंट जसकीरत सिंह रंगी (हमज़ा अली मज़ारी) की भूमिका निभाई है।

फिल्म की कहानी में दिखाया गया है कि कैसे ल्यारी की गलियों में रहमान डकैत और उजैर बलोच मिलकर अपना दबदबा बनाते हैं और राजनीति से लेकर अपराध तक को कंट्रोल करते हैं। जब यह फिल्म सिनेमाघरों में सुपरहिट हुई, तो लोगों ने गूगल पर उजैर बलोच और ल्यारी के गैंगवार के बारे में जमकर सर्च किया।

हकीकत यह है कि उजैर बलोच और उसका परिवार सालों तक ल्यारी के समानांतर प्रशासन चलाता रहा। फिल्म में दिखाए गए कई वाकये इसी ल्यारी की खूनी लड़ाइयों पर आधारित हैं।

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उजैर बलोच का खौफनाक इतिहास और मौजूदा स्थिति

उजैर बलोच का अपराध की दुनिया में आना एक बदले की कहानी से शुरू हुआ था। उसके पिता फैज मोहम्मद (मामा फैजू) की हत्या विरोधी गैंग के सरगना अरशद पप्पू ने कर दी थी। इसके बाद उजैर अपने मौसेरे भाई रहमान डकैत के गैंग में शामिल हो गया।

2009 में जब कराची पुलिस एनकाउंटर में रहमान डकैत मारा गया, तो उजैर बलोच ने पूरे नेटवर्क की कमान संभाल ली। उसने पीपुल्स अमन कमेटी बनाकर राजनीति और अपराध का ऐसा गठजोड़ तैयार किया, जिससे पूरी कराची कांपती थी।

  • आपराधिक मामले: उजैर पर 50 से अधिक हत्याओं, जबरन वसूली और पुलिस पर हमलों के मामले दर्ज हुए।
  • अंतरराष्ट्रीय जासूसी: 2016 में दुबई से पकड़े जाने के बाद उस पर सैन्य अदालत में मुकदमा चला। 2020 में उसे जासूसी के आरोप में 12 साल जेल की सजा सुनाई गई।
  • जमानत खारिज: मार्च 2026 में ही एंटी-टेररिज्म कोर्ट (ATC) ने उजैर बलोच की सात मामलों में जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं।

फिर से क्यों सुलग रहा है ल्यारी

कराची पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि जुबैर पर हमला पुरानी दुश्मनी का नतीजा है या फिर ल्यारी में दोबारा गैंगवार शुरू करने की साजिश।

स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि कराची ऑपरेशन के बाद जो गैंगस्टर ईरान और दुबई भाग गए थे, वे अब वापस लौटने लगे हैं। क्षेत्र में तनाव और वैश्विक उथल-पुथल का फायदा उठाकर पुराने गिरोह फिर से सक्रिय हो रहे हैं। ल्यारी के आम लोग अब इस डर में जी रहे हैं कि कहीं 2012 वाला खूनी दौर दोबारा वापस न आ जाए।

फिल्मों में दिखाई जाने वाली गैंगवार पर्दे पर चाहे कितनी भी रोमांचक लगे, लेकिन इसकी जमीनी हकीकत केवल खून-खराबा, डर और बेकसूरों की मौत होती है। जुबैर बलोच पर हुआ यह जानलेवा हमला साबित करता है कि ल्यारी से अपराध का साया अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

अब अगर आप ल्यारी और उजैर बलोच के इस पूरे नेटवर्क को गहराई से समझना चाहते हैं, तो पाकिस्तानी पुलिस और स्थानीय एजेंसियों की रिपोर्टिंग पर नजर रखें। सिर्फ फिल्मी कहानियों पर भरोसा करने के बजाय इतिहास के पन्नों को टटोलना ही आपको असली सच तक पहुंचाएगा।

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Grace Edwards

Grace Edwards is a meticulous researcher and eloquent writer, recognized for delivering accurate, insightful content that keeps readers coming back.